सीप्लेन: संभावना तो है, मगर राहें मुश्किल

गोरखपुर से वाराणसी तक मिलेगी सेवा

गोरखपुर। रामगढ़ताल में सी प्लेन उतारने की बात हो रही। ऐसा कहा जा रहा है कि गोरखपुर से वाराणसी तक सी प्लेन का सपना जल्द पूरा होगा। रामगढ़ताल, सी प्लेन के मानक पर खरा भी उतर रहा है। ताल की लंबाई, चौड़ाई और गहराई मानक के अनुरूप है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सी प्लेन की राह रामगढ़ताल से सीधे वाराणसी के लिए इतनी सुगह होगी, जानकार कहते हैं कि काम टेड़ा है। बहरहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरक्षनगरी से काशी तक सी प्लेन चलाने की घोषणा के साथ ही संभावनाओं की तलाश जारी है। इस पर मंथन भी होने लगा है। गोरखपुर से वाराणसी करीब 162 किलोमीटर की दूरी है। ऐसे में एक अनुमान के मुताबिक सी प्लेन से इस दूरी को घंटे भर में तय किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने पूरे देश में 100 सीप्लेन चलाने की घोषणा की है। पहला सी प्लेन गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती रिवरफ्रंट से केवडिया (एकता की मूर्ति) तक संचालित किया गया जो अभी सेवा दे रहा। स्पाइसजेट को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह गोरखपुर से वाराणसी के बीच भी सी प्लेन का संचालन तय हो चुका है। जल्द ही इसको लेकर तैयारियां शुरू की जा सकती हैं। जिस सी प्लेन का संचालन किया जा रहा है, उसमें 12 लोग एक बार में बैठ सकते हैं। सी प्लेन उडऩे एवं उतरने के लिए पानी में ही एक हवाईअड्डा बनाना होगा। इसकी लंबाई करीब 1160 मीटर जबकि चौड़ाई 120 मीटर होनी चाहिए। हवाईअड्डा के क्षेत्र में पानी की गहराई कम से कम 1.8 मीटर होनी चाहिए। शहर के किनारे भी विकास करना होगा। किनारे की ओर करीब 1.8 एकड़ भूखंड जरूरी है। यहां टर्मिनल आदि का निर्माण होगा। ताल में होने वाली अन्य गतिविधियों के लिए चिह्नित स्थान व हवाईअड्डा के बीच पर्याप्त दूरी होनी चाहिए। हवाईअड्डा ऐसी जगह बनाया जाएगा जहां प्रवासी पक्षियों की गतिविधियां न हों। सीप्लेन के लिए तय सभी मानक रामगढ़ताल पूरा कर रहा है। उत्तर से दक्षिण तक इसका फैलाव 4.2 किलोमीटर में है। इसी तरह पूरब से पश्चिम में यह ताल 2.5 किलोमीटर में फैला है। गर्मी में ताल की अधिकतम गहराई 2.5 मीटर जबकि बरसात के समय अधिकतम गहराई चार मीटर है। नजदीकी एयरपोर्ट से एरियल दूरी तीन किलोमीटर है।