एम्स: 300 शैया के अस्पताल के साथ शुरू होंगे 14 ओटी

जुलाई माह से भर्ती किए जाएंगे मरीज
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में अभी सिर्फ 10 विभागों की ओपीडी चल रही है जहां पर केवल मरीजों को चिकित्सकों द्वारा परामर्श दी जाती है। जुलाई से मरीजों की भर्ती भी शुरू हो जाएगी। एम्स में 750 बेड के अस्पताल का निर्माण चल रहा है। जुलाई तक 300 बेड का अस्पताल शुरू किया जाएगा और दिसंबर तक 750 बेड के साथ अस्पताल पूरी तरह चालू हो जाएगा।
एम्स में अस्पताल की पांच मंजिला दो बिल्डिंगें बनाई जा रही हैं। एक में 300 बेड व दूसरे में 420 बेड का अस्पताल शुरू होगा। 30 बेड आयुष विंग में रहेगा। 300 बेड वाले अस्पताल की बिल्डिंग सभी सुविधाओं के साथ कार्यदायी संस्था एम्स को जून तक सौंप देगी, जिसमें बेड, टेबल, ऑपरेशन थियेटर सहित सभी जरूरी सामान होंगे। इस बिल्डिंग में 14 ऑपरेशन थियेटर का निर्माण चल रहा है। 300 बेड अस्पताल के साथ 14 ऑपरेशन थियेटर (ओटी) भी शुरू हो जाएंगे। साथ ही 10 और विभाग बढ़ाए जाएंगे। अभी तक 10 विभागों का संचालन हो रहा है। जुलाई से अस्पताल चलाने की तैयारी में एम्स प्रशासन जुटा हुआ है। प्रशासनिक अधिकारी मेजर प्रवीण कुमार उपाध्याय के अनुसार आगामी जून तक अस्पताल बनकर पूरी तरह तैयार होने की उम्मीद है। इसे जुलाई से चालू कर दिया जाएगा।

परिसर में पचास डिस्मिल में बनेगा थाना भवन
एम्स परिसर में थाना भवन की स्थापना के लिए पचास डिस्मिल भूमि आवंटित हुई है। एसएसपी डा. सुनील गुप्त ने थाने लिए आवंटित भूमि का निरीक्षण किया। एम्स का ले-आउट देखकर उन्होंने थाना भवन बनाने के लिए आवंटित भूमि के लोकेशन की जानकारी ली। एम्स की स्थापना की मंजूरी मिलने के बाद ही पुलिस ने एम्स थाना स्थापित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। पिछले दिनों शासन ने प्रस्ताव को मंजूरी भी दे दी। एम्स परिसर में थाने के लिए आवंटित भूमि में प्रशासनिक भवन के साथ ही पुलिसकर्मियों के लिए आवास भी बनवाए जाएंगे। एम्स का निर्माण करा रही एजेंसी के इंजीनियर अग्निवेश दाहिया ने ले आउट की मदद से थाने के लिए आवंटित जमीन के बारे में बताया और एसएसपी को स्थलीय निरीक्षण भी कराया। एम्स पुलिस चौकी पहले से अस्तित्व में है। कैंट, खोराबार, शाहपुर, चौरीचौरा और पिपराइच के कुछ हिस्सों को शामिल किया जाएगा।

अस्थाई थाने के लिए नहीं मिल रही जगह
एम्स थाने का प्रस्ताव मंजूर होने के बाद अस्थाई तौर इसकी स्थापित कर थानेदार और अन्य पुलिसकर्मियों की नियुक्ति की जानी है। ताकि यह थाना वजूद में आ जाए और कामकाज शुरू हो सके लेकिन इसके लिए जगह नहीं मिल रही है। पहले एयरफोर्स पुलिस में अस्थाई तौर पर थाना स्थापित करने का निर्णय लिया गया लेकिन जगह कम होने और लाकप न होने की वजह से इस पर अमल नहीं किया जा सका। जगदीशपुर और सोनबरसा पुलिस चौकी में भी यही समस्या पेश आ रही है। फिलहाल अस्थाई तौर पर थाने के लिए जगह जोर-शोर से खोजी जा रही है।

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