बेवजह बयानबाजी से बचें: बीजेपी शीर्ष

स्वमी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने के बाद भाजपा ने हिदायत

 

नई दिल्ली। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले योगी आदित्यनाथ कैबिनेट से स्वामी प्रसाद मौर्य और तीन अन्य बीजेपी विधायकों का इस्तीफा भाजपा के लिए बड़ा झटका है। पूर्वी यूपी से संबंध रखने वाले और कुशवाहा समुदाय के बड़े नेता मौर्य ने साल 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी जॉइन की थी। वह पांच बार के विधायक हैं और साल 2002 से मंत्री पद संभाल रहे थे। मौर्य जैसे नेताओं की बदौलत बीजेपी अलग-अलग क्षेत्रों के ओबीसी वोटरों को लुभाने में कामयाब हुई थी। मंगलवार को जहां भाजपा के बड़े नेता दिल्ली में थे वहीं सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी दिल्ली में थे और यहां चुनाव के पहले दो चरणों के लिए उम्मीदवारों पर मंथन किया जा रहा था। इस बैठक के दौरान मौर्य के इस्तीफे पर भी चर्चा हुई। हालांकि जानकारी के मुताबिक बीजेपी नेतृत्व मौर्य के इस्तीफे से सजग हो गया है और उत्तर प्रदेश के सभी नेताओं को यह निर्देश दिया है कि वे नाराज चल रहे विधायकों और नेताओं से संपर्क करें और उन्हें पार्टी न छोडऩे के लिए मनाएं। खबर के मुताबिक, यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने खुद स्वामी प्रसाद मौर्य से फोन पर बात की। डिप्टी सीएम केशव मौर्य, यूपी बीजेपी चीफ स्वतंत्र देव सिंह और राज्य के बीजेपी महासचिव सुनील बंसल को भी यह काम सौंपा गया है कि वे उन नेताओं से बातचीत करें जो आने वाले दिनों में पार्टी छोड़ सकते हैं। अटकलें यह भी हैं कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब कुशीनगर की पडरौना सीट से समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे वहीं पास के ही फाजिलनगर सीट से वह अपने बेटे को टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहे हैं।