ओपीडी में भी कोविड टीकाकरण के लिए लोगों को प्रेरित कर रहीं डॉ. शालिनी

क्षेत्र में टीका से इनकार करने वालों को फोन कर बताती हैं टीका का फायदा

खुद का उदाहरण देकर धात्री महिलाओं को टीकाकरण के लिए करती हैं तैयार

गोरखपुर। झरना टोला शहरी स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शालिनी श्रीवास्तव ओपीडी में आने वाले मरीजों को प्रेरित कर कोविड टीकाकरण करवा रही हैं । आशा और एएनएम की टीम के कहने पर जो लोग टीका लगवाने से मना करते हैं उनको फोन कर टीके के फायदे बताकर टीकाकरण करवाती हैं । धात्री महिलाओं को तो टीका लगवाने के लिए वह खुद का उदाहरण भी देती हैं । समुदाय को प्रेरित करने वाली डॉ. शालिनी ने खुद के प्रयासों से 100 से अधिक इनकार करने वालों का टीकाकरण करवाया है ।

डॉ. शालिनी के समझाने पर टीकाकरण करवाने वाले फागु (74) और शांति देवी (68) हृदय रोगी हैं । दोनों को टीका लगे एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है । नंदानगर के रहने वाले फागु सेवानिवृत्त रेलकर्मी हैं । वह बताते हैं कि पति-पत्नी दोनों लोगों की एंजियोप्लास्टी हुई है, इसलिए टीकाकरण से डर लग रहा था । डॉक्टर शालिनी ने समझाया कि टीकाकरण से कोई दिक्कत नहीं होगी । इसके बाद उन्होंने रेलवे अस्पताल के अपने चिकित्सक से भी परामर्श लिया । झरना टोला स्वास्थ्य केंद्र पर उनका टीकाकरण हुआ । उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई । वह करते हैं कि गंभीर बीमारी के रोगियों को चिकित्सक की सलाह से कोविड टीका अवश्य लगवाना चाहिए ।

दरगहिया इलाके की रहने वाली रिंकू देवी (30) का बच्चा सात महीने का है । वह बच्चे को स्तनपान कराती हैं, इसलिए टीका लगवाने से डर रही थीं । रिंकू बताती हैं कि डॉक्टर शालिनी ने उन्हें बताया कि जब उन्होंने अपना कोविड टीकाकरण करवाया था तब उनका भी बच्चा दो साल का था और स्तनपान कर रहा था। टीके से बच्चे को कोई दिक्कत नहीं हुई । रिंकू ने ओपीडी में प्रेरित होकर टीकाकरण करवाया। उनको हल्का बुखार हुआ जो खुद से ठीक हो गया । रिंकू का कहना है कि प्रत्येक गर्भवती व धात्री को टीका लगवाना चाहिए । उन्हें बताया गया है कि कोविड का टीका न केवल मां के लिए बल्कि बच्चे के लिए भी फायदेमंद है ।

गर्भवती को भी करती हैं मोटिवेट

वर्ष 2013 में शिवपुर सहबाजगंज स्वास्थ्य केंद्र से संविदा चिकित्सा अधिकारी के तौर पर कार्य शुरू करने वाली 35 वर्षीया चिकित्सा अधिकारी डॉ. शालिनी ने चौरीचौरा जैसे ग्रामीण क्षेत्र में भी सेवाएं दी हैं । एक नियमित चिकित्सा अधिकारी के तौर पर वर्ष 2017 में उन्होंने झरना टोला शहरी स्वास्थ्य केंद्र पर सेवा शुरू की । कोविड काल में मरीजों को दी गयी सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है । डॉ. शालिनी का कहना है कि समुदाय को सच्चे उदाहरणों के जरिये ही प्रेरित किया जा सकता है । सबसे चुनौतीपूर्ण होता है गर्भवती को प्रेरित करना । वह बताती हैं कि उनके क्षेत्र में कई गर्भवती को गर्भधारण के बारे में पता नहीं था और उन्होंने टीकाकरण करवा लिया। इससे उनके गर्भ पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा । यही उदाहरण गर्भवती को दिया जाता है और समझाने के बाद वह टीकाकरण के लिए तैयार हो जाती हैं ।

113 फीसदी प्रथम डोज टीकाकरण करवाया

डॉ. शालिनी झरना टोला के अलावा रामपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र की भी प्रभारी हैं। दोनों स्थानों को मिला कर उन्होंने 113 फीसदी प्रथम डोज टीकाकरण करवा लिया है । उनके क्षेत्र के 70 फीसदी लोगों ने कोविड टीके की दूसरी डोज भी ले ली है । अब वह लाभार्थियों को कॉलिंग करवा कर सेकेंड डोज वैक्सीनेशन करवा रही हैं ।

टीके के बाद भी करें प्रोटोकॉल का पालन

डॉ. शालिनी का कहना है कि कोविड टीकाकरण के बाद भी लोगों को कोविड नियमों का सख्ती से पालन करना है । मास्क लगाना है। अनावश्यक भीड़भाड़ में नहीं जाना है । दो गज की दूरी बना कर रखनी है और हाथों की स्वच्छता के नियमों का पालन करना है। कोविड टीकाकरण के बाद भी कोरोना हो सकता है लेकिन जटिलताएं नहीं बढ़ती हैं ।