शिवराज सरकार के मंत्री व विधायक की जुबान से निकल रहे विवादित बयान

भोपाल (मध्यप्रदेश)। भाजपा की शिवराज सरकार के मंत्री और पार्टी के विधायक इस समय बेलगाम नजर आते हैं। बयान देने में होड़ लगी रहती है। विवादित मुद्दा हो या कोई मांग, मंत्री-विधायक अपने विचारों को रखने से नहीं चूकते। कर्नाटक से उठे हिजाब विवाद में मंत्रियों के बयानों पर तो पार्टी को यू टर्न तक लेना पड़ा और कैबिनेट की बैठक तक में इसकी गूंज सुनाई दे चुकी है। इन दिनों सरकार के मंत्री और भाजपा के विधायकों में बयान देने की होड़ की स्थिति बन गई है। हिजाब के विवादित मुद्दे पर मंत्रियों ने जिस तरह बयानबाजी की, उससे सरकार को यू टर्न लेना पड़ा था। हिजाब को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने बयान दिया था कि स्कूलों में इस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और ड्रेस कोड की बात कही थी। उनके साथ उसी दिन नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने भी ड्रेस कोड की बात कही थी। जबकि इस विवादित मुद्दे का पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर असर पडऩे की आशंकाओं की वजह से पार्टी इस पर बयान देने से बच रही थी और शिवराज सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा भी कोर्ट में मामला होने का हवाला देकर इस पर टिप्पणी करने से बचते रहे थे।
हिजाब के विवादित मुद्दे पर स्कूल शिक्षा मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री के बयानों के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में भी मुद्दा उठा था। विवादित मुद्दे पर बयानों की बात भी उसमें उठी तो ऐसे मामलों में बयान देने से बचने की हिदायत तक दी गई। कैबिनेट बैठक के बाद फिर स्कूल शिक्षा मंत्री परमार ने सफाई दी थी और बयान का वीडियो वायरल भी किया गया।
वित्त मंत्री का बेतुका बयान, शेरशाह सूरी से तुलना
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा का एक बयान भी सामने आया जिसमें उन्होंने मुगलकाल के आततायी शेरशाह सूरी से पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी से तुलना कर दी थी। उन्होंने सडक़ निर्माण के लिए अटलबिहारी बाजपेयी की तुलना की। देवड़ा ने यह कह दिया था कि सडक़ निर्माण इतिहास में शेरशाह सूरी ने काम किया था और आजाद भारत में अटलबिहारी बाजपेयी ने यह किया। वित्त मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने भाजपा को आड़े हाथों लिया था।
नाम बदलने की मांग की होड़: भाजपा नेतृत्व ने जनजातीय समुदाय के वोट बैंक के लिए रानी कमलापति के नाम पर हबीबगंज स्टेशन और नर्मदा नदी के प्रति लोगों की आस्था को देखते हुए होशंगाबाद का नाम बदला था लेकिन पार्टी के विधायकों ने अपने स्तर पर नाम बदलने की मांग शुरू कर दी है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने ओबेदुल्लागंज, रायसेन तो रमेश मेंदोला ने इंदौर के नाम बदलने की मांग उठा दी हैं।