यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर भी कुप्रभाव डाल रहा है सिगरेट का धुंआ

 

सेक्सुअल डिसआर्डर, नपुंसकता और बांझपन जैसी बीमारियों का खतरा ज्यादा

कोविड काल में सिगरेट से कम हो रही रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकती है जटिलताएं

गोरखपुर। पेशे से शिक्षक अविनाश (काल्पनिक नाम) को किशोरावस्था से ही सिगरेट की लत थी। 28 वर्ष की उम्र में जब विवाहित हुए तो शुरू में उन्होंने खुद को सेक्सुअली कमजोर पाया। चिकित्सक को दिखाया तो पता चला कि वह नपुंसकता की ओर बढ़ रहे हैं। एक वर्ष तक इलाज कराया और सिगरेट हमेशा के लिए छोड़ दी। इसके बाद अविनाश का जीवन सामान्य हुआ।

अविनाश का मानना है कि किशोरावस्था में सिगरेट की लत न केवल फेफड़े क्षतिग्रस्त होते हैं, बल्कि उम्र के साथ यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। इसके भुक्तभोगी वह खुद हैं। अविनाश ने बताया कि इलाज में लाखों रुपये खर्च हुए। समय रहते चिकित्सक की सलाह पर मैं सिगरेट न छोड़ता तो शायद कभी पिता भी न बन पाता। सिगरेट छोड़ने और इलाज के बाद अविनाश दो बच्चों के पिता भी बन चुके हैं। विशेषज्ञों का भी कहना है कि सिगरेट के कारण सेक्सुअल डिसआर्डर, नपुंसकता और महिलाओं में बांझपन जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है। वैसे भी कम रोग प्रतिरोधक क्षमता कोविड काल में अभिशाप साबित हुई है।

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार दूबे जो कि एक श्वसन रोग विशेषज्ञ भी हैं, बताते हैं कि एक सिगरेट में लगभग 64 कार्सीमोजोंस होते हैं । यह वही कार्सीमोजोंस हैं जिनसे सड़क निर्माण का तारकोल बनता है । सिगरेट में कैडमियम होता है और सिगरेट से बेंजीन निकलते हैं जो जीन परिवर्तन कर देते हैं। सिगरेट का धुँआ जब शरीर में पहुंचता है तो फेफड़े, लीवर और गुर्दे को प्रभावित करता है । पुरुषों को नपुंसक बनाता है जबकि गर्भवती के गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है और सिगरेट पीने वाली गर्भवती के बच्चे कम वजन के पैदा होते हैं। चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, निकोटिन का एडिक्शन होता है । उच्च रक्तचाप की दिक्कत आती है, रक्त की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल इकट्ठा होता है जो ब्रेन हेमरेज और फालिज मारने की अवस्था तक पहुंचा देता है। मधुमेह के मरीजों के लिए तो यह और भी घातक है। ह्रदय संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ।

हर साल विश्व में 80 लाख लोगों की मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट पर 26 जुलाई 2021 को प्रकाशित एक रिपोर्ट की मुताबिक तंबाकू और सिगरेट के इस्तेमाल से विश्व में हर साल 80 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है। इनमें से 70 लाख लोग सीधे तंबाकू का सेवन करने से मृत्यु के शिकार होते हैं तो 12 लाख लोग दूसरे के द्वारा की जा रही स्मोकिंग के धुएं के कारण मृत्यु का शिकार हो रहे हैं । रिपोर्ट के मुताबिक 65000 बच्चे हर हाल सार्वजनिक स्थानों पर पैसिव स्मोकिंग के धुएं के कारण मृत्यु का शिकार होते हैं, क्योंकि उन्हें प्रदूषित वातावरण में जीना पड़ता है । एक अरब 30 करोड़ तंबाकू का इस्तेमाल करने वाले लोग अविकसित और विकासशील देशों में हैं, जिनमें भारत जैसे देश भी शामिल हैं ।

जिले में तंबाकू के इस्तेमाल की स्थिति

राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण पांच ( 2019-21) के मुताबिक गोरखपुर में 15 वर्ष से अधिक उम्र की 5.4 फीसदी महिलाएं तंबाकू का इस्तेमाल कर रही हैं। यह इस्तेमाल तंबाकू के सीधे सेवन के अलावा बीड़ी और सिगरेट के माध्यम से भी हो रहा है । इसी प्रकार 15 वर्ष से अधिक उम्र के 44.6 फीसदी पुरुष तंबाकू का सेवन कर रहे हैं ।

ऐसे छूट गई सिगरेट की लत

पेशे से चिकित्स डॉ. अमित (काल्पनिक नाम) को कॉलेज लाइफ में सिगरेट की लत थी। वह चेन स्मोकिंग के शिकार हो गये । कुछ स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें आईं तो सिगरेट छोड़ने की ठान ली। वह बताते हैं कि सिगरेट छोड़ने के लिए उन्होंने खुद को काम में तल्लीन किया। जब भी कोई खाली बैठता है तो सिगरेट की तलब हो सकती है । उन्होंने जब खुद को काम में बिजी रखा और चाय एवं इलाइची जैसी चीजों का सेवन विकल्प के तौर पर बढ़ा दिया तो धीरे-धीरे सिगरेट भूलने लगे। इस तरह पांच साल की तलब हमेशा के लिए खत्म हो गयी । सिगरेट की तलब होने पर कोई अच्छी चीज विकल्प में रखी जाए तो आदत छूट सकती है ।