गहलोत सरकार ने कोर्ट में कहा- पूर्व सीएम वसुंधरा को वरिष्ठ एमएलए के नाते दिया आवास

जयपुर (राजस्थान)। राजस्थान हाईकोर्ट ने आज गहलोत सरकार को बड़ी राहत दी है। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को बंगला देने से जुड़ी अवमानना याचिका खारिज कर दी है। गहलोत सरकार ने दो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और जगन्ननाथ पहाडिय़ा को बंगला आवंटित किया था। पहाडिय़ा का निधन हो चुका है। उन्होंने बंगला भी लौटा दिया था। हाईकोर्ट के फैसले से वसुंधरा राजे को भी राहत मिली है। गहलोत सरकार ने कोर्ट की अवमानना से बचने के लिए सिविल लाइंस स्थित बंगला वरिष्ठ विधायक के नाते आवंटित किया है। कोर्ट ने पक्षकार बनाए गए अफसरों को भी अवमानना से मुक्त कर दिया है। जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की खंडपीठ ने ये आदेश मिलापचन्द डांडिया की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा की मामले में विल फुल कंटेम्प्ट नहीं हुआ है। अवमानना याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने 4 सितंबर, 2019 को आदेश जारी कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम, 2017 के उस प्रावधान को रद्द कर दिया था, जिसके तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं देने का प्रावधान किया गया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 6 जनवरी को खारिज कर दिया था। पूर्व सीएम राजे ने सिर्फ सुविधाएं लौटाई थी। याचिकाकर्ता ने ये भी बताया कि राज्य सरकार ने 18 अगस्त, 2020 को वरिष्ठ विधायकों को आवास आवंटित करने के लिए कैटेगरी तय की थी. जिसके तहत पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को आवास देने की बात कही जा रही थी, लेकिन वे पहले से वहां रह रही हैं। वहीं राज्य सरकार ने 2 अगस्त 2019 को प्रावधान किया था की तय अवधि में आवास खाली नहीं करने पर संबंधित मंत्री को प्रतिदिन दस हजार रुपए का हर्जाना देना होगा।
कोर्ट में गहलोत सरकार का तर्क
अदालती आदेश 4 सितंबर 2019 से 17 अगस्त 2020 तक की अवधि में बंगले का उपयोग करने पर पूर्व सीएम राजे से हर्जाना नहीं करने पर गहलोत सरकार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को वरिष्ठ विधायक के नाते आवास दिया गया है। इसमें अदालती आदेश की अवमानना नहीं हुई है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने अवमानना याचिका को खारिज कर दिया है।