निकट संपर्की और देखभाल कर्ता अवश्य करें टीपीटी का सेवन

छह माह तक प्रतिदिन खानी है बचाव की दवा

 

150 चिकित्सक व स्वास्थ्यकर्मी प्रशिक्षित

गोरखपुर। अगर घर में कोई पल्मनरी टीबी (फेफड़ों की टीबी) का मरीज है तो टीबी से बचाव के लिए परिवार के हर सदस्य को टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) के तहत दवा लेना अनिवार्य है। इसके तहत छह महीने तक प्रतिदिन चिकित्सक की सलाह पर दवा लेनी है। इस संबंध में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 150 चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉक्टर रामेश्वर मिश्र ने बताया कि स्वयंसेवी संस्था जीत टू की मदद से 1500 लोगों को इस समय टीपीटी दी जा रही है। पहले यह सिर्फ पांच साल से कम उम्र के बच्चों को दी जाती थी, लेकिन अब इसे पांच साल से अधिक उम्र के लोगों को भी आवश्यक जांच के बाद देना है।

पहले पल्मनरी टीबी मरीजों के संपर्की की जांच होगी और अगर वह टीबी पाजीटिव है तो इलाज होगा। यदि वह टीबी निगेटिव है तो टीपीटी चलेगी। यह सुविधा सरकार की तरफ से नि:शुल्क है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिला भी यह दवा लेंगी। लीवर के मरीज चिकित्सक की देखरेख में दवा लेंगे, जबकि ओरल कंट्रासेप्टिव लेने वाली महिलाएं यह दवा लेते समय परिवार नियोजन के नान ओरल मेथड का इस्तेमाल करेंगी। इस संबंध में उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉक्टर विराट स्वरूप श्रीवास्तव और पाथ कंसल्टेंट डॉक्टर नीरज किशोर पांडेय ने शुक्रवार व शनिवार को अलग-अलग बैच में एक होटल में प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सकों से नये बाल टीबी रोगियों को ढूंढने को भी कहा गया।

इस मौके पर पीपीएम समन्वयक एएन मिश्र, केके शुक्ला, इंद्रनील, संजय सिन्हा, एमए बेग, मयंक, गोबिंद और अभिनंदन ने सहयोग किया। डॉक्टर एएन त्रिगुट, डॉक्टर संजय त्रिपाठी, डॉक्टर अमरनाथ, डॉक्टर पवन और सद्दाम प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

हो सकती है टीबी

डीटीओ ने बताया कि दो सप्ताह से अधिक की खांसी टीबी हो सकती है, मगर प्रत्येक खांसी टीबी नहीं होती है | अगर यह दिक्कत है तो टीबी की जांच अवश्य कराएं । शरीर में टीबी मुख्यतया फेफड़ों को ही प्रभावित करती है, जिसे पल्मनरी टीबी कहते हैं, लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी टीबी होती है । नाखून और बाल छोड़ कर शरीर के सभी अंगों की टीबी रिपोर्टेड है। ऐसी टीबी एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहलाती है और इसकी पहचान विशेषज्ञों द्वारा ही की जाती है । गैर फेफड़े वाले टीबी मरीज तो संक्रमण नहीं फैलाते लेकिन फेफड़ों के टीबी का धनात्मक मरीज अगर उपचार नहीं लेता है तो साल भर में दस से पंद्रह लोगों को मरीज बना देता है। टीपीटी पल्मनरी टीबी यानी फेफड़ों की टीबी वाले मरीज को ही दी जाती है।

हर तीन मिनट में मौत

डीटीओ ने बताया कि हर तीन मिनट में टीबी के दो मरीजों की मृत्यु हो जाती है । भारत में प्रत्येक एक लाख की आबादी पर 192 टीबी मरीज वर्ष 2020 में पाए गये ।