आंखें दान की हैं..दो बेटों और पति को खोया, ऐसी है द्रौपदी मुर्मू की कहानी

नई दिल्ली। एनडीए की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को देश भर से बधाइयां मिल रही हैं। राज्यों के मुख्यमंत्रियों के अलावा अन्य हस्तियां भी उन्हें अग्रिम शुभकामनाएं दे रहे हैं। निर्वाचित होने पर मुर्मू आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली भारत की पहली राष्ट्रपति होंगी। झारखंड राज्य बनाए जाने के बाद मुर्मू पहली ऐसी राज्यपाल रहीं जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया। हालांकि मुर्मू का राजनीतिक जीवन काफी उतार चढ़ाव वाला रहा। उनका निजी जीवन भी कई बार चर्चा में आया। दरअसल ओडिशा स्थित भुवनेश्वर के रमा देवी वुमन्स कॉलेज से ग्रेजुएशन करने वालीं मुर्मू ने अपनी करियर की शुरुआत सभासद पद से की थी। ओडिशा के रायरंगपुर जिले की नगर पंचायत में वो पहली सभासद चुनी गई थीं। इसके बाद मयूरभंज विधानसभा सीट से दो बार (2000, 2009) विधायक चुनी गईं। इसके साथ ही ओडिशा में बीजेपी और बीजेडी की गठबंधन वाली सरकार में मुर्मू मंत्री भी रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा पड़ाव उस समय आया जब साल 2015 में उन्हें झारखंड का गवर्नर बनाया गया था। हालांकि मुर्मू का निजी जीवन बेहद उतार चढ़ाव वाला रहा। द्रौपदी मुर्मू संथाली आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उनकी शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। श्याम चरण मुर्मू और द्रौपदी मुर्मू को तीन संतानें हुईं। इनमें दो बेटे और एक बेटी हुए लेकिन मुर्मू के पति और दोनों बेटों की मृत्यु हो चुकी है। अभी परिवार में मुर्मू की एक बेटी है।