सिर्फ रक्त और यौन सम्पर्क से फैलता है एड्स, मरीजों से न करें भेदभाव

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जनजागरूकता रैली को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया

हस्ताक्षर अभियान में सैकड़ों लोगों ने हस्ताक्षर कर लिया जनजागरूकता का संकल्प

मंडलीय कारागार पहुंच कर विभागीय टीम ने बंदियों और कर्मचारियों को भी किया जागरूक

गोरखपुर। एड्स का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रसार सिर्फ रक्त और यौन सम्पर्क से होता है । इस बीमारी के मरीज के साथ रहने में कोई खतरा नहीं है । लोगों को एड्स मरीजों के साथ भेदभाव का बर्ताव नहीं करना चाहिए बल्कि उनके साथ सामान्य जीवन जीना चाहिए। उक्त अपील मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे ने की । वह एड्स सम्बन्धित जनजागरूकता रैली को सम्बोधित कर रहे थे । उन्होंने सीएमओ कार्यालय से रैली को हरी झंडी दिखा कर गुरूवार को रवाना किया । उन्होंने खुद भी रैली में प्रतिभागिता की । इस मौके पर हस्ताक्षर अभियान का भी आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों लोगों ने हस्ताक्षर कर जन जागरूकता का संकल्प लिया। विभाग की टीम ने मंडलीय कारागार पहुंच कर वहां बंदियों और कर्मचारियों को भी जागरूक किया ।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एड्स के प्रति समाज में कई तरह के मिथक व भ्रांतियां हैं। इस कारण लोग मरीजों के साथ भेदभाव करते हैं। समाज में इन भ्रांतियों का खंडन कर जागरूकता का संदेश देना होगा। लोगों को बताना होगा कि एड्स मरीज के साथ बैठने, सामान्य मेल मिलाप, हाथ मिलाने, एक ही बर्तन में खाना खाने व पानी पीने, मच्छर या खटमल काटने से, एक दूसरे का कपड़ा एवं एक ही शौचालय का इस्तेमाल करने से, एक ही सवारी गाड़ी का इस्तेमाल करने से, एक साथ खेलने से, एक ही तरण ताल में नहाने से, चुम्बन करने से, एक ही फोन व ऑफिस का इस्तेमाल करने से, खांसने या छींकने से, पैसे एवं सामान के आदान प्रदान से और गले मिलने से एड्स का संक्रमण नहीं होता है इस बीमारी का संक्रमण संक्रमित पुरुष के वीर्य, महिला के योनि स्राव, रक्त व मां के दूध के सम्पर्क में आने से होता है। कंडोम के साथ सुरक्षित यौन सम्बन्ध और संक्रमित के रक्त को शरीर में प्रवेश से रोकने के उपायों के जरिये इसके वायरस से बचा जा सकता है।

एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ गणेश प्रसाद यादव ने बताया कि एड्स बीमारी एचआईवी नामक विषाणु से होती है जो मानव शरीर के बीमारियों से लड़ने की क्षमता को कम करता है। यह सिर्फ मानव शरीर में होता है। एड्स एचआईवी की आखिरी अवस्था है, जब शरीर रोगों से लड़ने की अपनी क्षमता खो देता है । यह वह अवस्था है जब मनुष्य में एचआईवी के साथ-साथ अन्य बीमारियों के लक्षण भी दिखने लगते हैं । एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध, उसके रक्त या रक्त उत्पाद के चढ़ाए जाने से, संक्रमित सीरिंज या सुई द्वारा, संक्रमित रक्त एवं रक्त उत्पाद द्वारा और एचआईवी संक्रमित गर्भवती द्वारा उसके बच्चे को इसका संक्रमण हो सकता है । एचआईवी से एड्स की अवस्था में पहुंचने में पांच से दस साल तक का समय लग जाता है । इस बीच समय से लक्षणों की पहचान कर दवाओं के नियमित सेवन, डॉक्टरी सलाह और खुद की देखभाल से इस समयावधि को बढ़ाया जा सकता है । एड्स के प्रमुख लक्षणों में वजन घटना, एक महीन से अधिक बुखार आना और एक महीने से अधिक दस्त रहना शामिल हैं। लगातार खांसी, चर्म रोग, मुंह एवं गले में छाले होना, लगातार सर्दी एवं जुकाम, लसिका ग्रंथियों में सूजन व गिल्टी होना, याददाश्त खोना, मानसिक क्षमता कम होना और शारीरिक शक्ति का कम होना इसके सामान्य लक्षण हैं ।

जनजागरूकता रैली शास्त्री चौक, टाउनहाल और घोष कंपनी चौराहा होते हुए जिला क्षय रोग केंद्र पर सम्पन्न हुई। रैली में एडी कन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिका डॉ बिंदु पांडेय की अगुआई में वहां की छात्राओं ने भी प्रतिभाग किया । इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ नंद कुमार, एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डॉ नंदलाल कुशवाहा, डिप्टी सीएमओ डॉ अनिल कुमार सिंह, एआरओ एसएन शुक्ला, एड्स नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े धर्मवीर प्रताप सिंह, अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग, सुनील सिंह, राजेश सिंह, गोबिंद, कमलेश, इंद्रनील, एसटीएस संजय सिन्हा, वर्ल्ड विजन इंडिया संस्था के जिला समन्वयक शक्ति पांडेय व उनकी टीम समेत विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे ।

5290 मरीजों का चल रहा है इलाज

नोडल अधिकारी डॉ यादव ने बताया कि जिले में 5290 एचआईवी संक्रमित मरीज दवा लेकर सामान्य जीवन जी रहे हैं । इनमें से 380 बच्चे हैं । कुल 22 एचआईवी संक्रमित गर्भवती हैं जिनके सुरक्षित प्रसव के इंतजाम किये जा रहे हैं। 58 मरीज ऐसे हैं जिन्हें एचआईवी के साथ टीबी भी है । टीबी मरीज के एचआईवी ग्रसित होने की आशंका ज्यादा होती है, इसलिए प्रत्येक टीबी मरीज की एचआईवी जांच भी कराई जाती है ।