पियूष जैन पर सच कौन बोल रहा, मोदी, योगी, अमित शाह या फिर अखिलेश?

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लखनऊ। कानपुर के इत्र कारोबारी पियूष जैन पर आखिर सच कौन बोल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, गृहमंत्री अमित शाह या फिर अखिलेश यादव। फिलहाल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कब होंगे, होंगे भी या टल जाएंगे, इन सारे सवालों के जवाब में अभी अनिश्चितता बनी है, मगर एक बात है कि यूपी की सियासत को पियूष जैन ने गरम कर दिया है। उन्हें लेकर पार्टियों के बीच संग्राम छिड़ चुका है। चुनावी संग्राम में पिछले कुछ दिनों से एक ही मुद्दा ज़ोर-शोर से उठ रहा है, वह यह कि पियूष जैन किसका। भाजपा या सपा का। तस्वीर साफ नहीं हो सकी है कि पियूष जैन भाजपा से जुड़े माने जाएंगे या फिर समाजवादी पार्टी से। मगर दोनों ही पार्टियां पियूष जैन को अब अपने खेमे में लेने का राजी नहीं। अलबत्ता उन्हें लेकर तरह-तरह के बयान जारी हो रहे हैं। कानपुर के व्यवसायी पीयूष जैन के ठिकानों पर पड़े छापों में ढाई सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा के नोट और सोना, चांदी मिले हैं। टैक्स चोरी के आरोप में पीयूष जैन को गिरफ़्तार हंै। मगर पीयूष जैन के पास से जो रकम बरामद हुई है, उसके तार क्या राजनीति से जुड़े हैं? और जुड़े हैं तो किस राजनीतिक दल से ? इस सवाल का स्पष्ट जवाब फि़लहाल मिलता नहीं दिख रहा। क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष-दोनों ही पियूष जैन को लेकर अपने-अपने बयान जारी कर रहे हैं। पियूष जैन के यहां छापा पडऩे के बाद भाजपा, अखिलेश यादव पर हमलावर हो गई। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा कि पियूष जैन के तार सपा से जुड़े हैं। मगर कुछ ही घंटे बाद अखिलेश यादव ने इसका खंडन किया और कहा कि भाजपा के अधिकारियों ने गलत जगह छापा डाल दिया। 28 दिसंबर को कानपुर में एक जनसभा में पीएम मोदी ने कहा – ये लोग ज़रुर कहते हैं, ये तो हमने किया था, ये तो हमने तो किया था, मैं सोच रहा था कि बीते दिनों जो बक्से भर-भर के नोट मिले हैं, उसके बाद भी ये लोग कहेंगे कि ये भी हमने ही किया है। 2017 से पहले भ्रष्टाचार का जो इत्र उन्होंने पूरे यूपी में छिडक़ रखा था, वो फिर सबके सामने आ गया है, लेकिन अब वो मुंह पर ताला लगाके बैठे हैं, क्रेडिट लेने आगे नहीं आ रहे हैं। नोटों का जो पहाड़ पूरे देश ने देखा, वही उनकी उपलब्धि है, वही उनकी सच्चाई है। गृह मंत्री अमित शाह ने 28 दिसंबर को हरदोई में इसी मसले पर खुलकर अखिलेश यादव का नाम लिया। अमित शाह ने कहा कि कुछ दिन पहले इनकम टैक्स विभाग ने रेड लगाई। भाई अखिलेश को पेट के अंदर बहुत मचलन हुई। ये राजनीतिक द्वेष के कारण रेड लगी है, और आज उनको जवाब देते नहीं बनता है कि समाजवादी इत्र बनाने वाले के वहां से ढाई सौ करोड़ रुपया कैश मिला है। ये ढाई सौ करोड़ किसका है, ये यूपी की जनता का लूटा हुआ ढाई सौ करोड़ इत्र वाले के घर से मिला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी सभाओं में खुलकर कह रहे हैं कि छापे में पकड़े गये इत्र व्यापारी का संबंध समाजवादी पार्टी से है।

समाजवादी पार्टी का दावा – झूठ बोल रहे योगी
अखिलेश यादव और उनकी पार्टी लगातार यह बताने से नहीं चूक रही कि पकड़े गए इत्र व्यापारी का उनसे कोई संबंध है। अखिलेश यादव का कहना है कि भाजपा इस मामले में झूठ बोल रही है। उन्होंने योगी आदित्यनाथ पर भी झूठ बोलने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव का कहना है कि इस व्यक्ति का समाजवादी इत्र बनाने वाले से जो रिश्ता जोड़ा जा रहा है वो सरासर झूठ है। इससे बड़ा झूठ कुछ हो ही नहीं सकता। वह सवाल उठाते हैं कि बैंक आपका, सरकार आपकी, फिर यह जिम्मेदारी किसकी है कि कोई इतनी नोट अपने यहां कैसे जमा कर लेगा। ये जो पैसा निकला है, ये क्या हवाई जहाज़ से आया होगा। सपा के डिजिटल मीडिया कोऑर्डिनेटर मनीष जगन अग्रवाल लगातार इस मामले पर अपनी बात रख रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उनके ट्वीट को शेयर कर रहे हैं। मनीष जगन अग्रवाल ने लिखा है कि भाजपा ने चंदा मांगा था और व्यापारी ने नहीं दिया तो छापा डलवा दिया। अब बरामद नकदी को टर्नओवर मान लिया गया है। अब काली रकम को सफे़द करने का रास्ता दे दिया गया है। अब भाजपा ने व्यापारी के साथ सेटिंग कर ली है। मनीष के मुताबिक पियूष जैन भाजपाई है। सपा शुरू से कहती आ रही, मामला ज्यादा चंदा वसूली का था। मनीष अग्रवाल ने इससे पहले पिछले सप्ताह 24 दिसंबर को भी ट्वीट कर स्पष्ट किया था कि पीयूष जैन से उनकी पार्टी का कोई संबंध नहीं है। अग्रवाल ने लिखा था- कानपुर में शिखर पान मसाला गु्रप और इत्र कारोबारी पीयूष जैन के घर पड़े छापों और बरामद नकदी, नोटबंदी की विफलता की कहानी बयां कर रही है। भाजपा व मीडिया पीयूष जैन और शिखर पान मसाले को सपा से जबरन जोडक़र सपा को बदनाम कर रही। सपा एमएलसी पम्पी जैन से पीयूष जैन का कोई मतलब नहीं है। छापे की जद में आये दोनों कारोबारी भाजपा से जुड़े हुए हैं। भाजपा को चंदा देते थे। भाजपा ने इस बार इनसे ज्य़ादा चुनावी चंदा मांगा। इन्होंने ज्य़ादा चुनावी चंदा देने से मना कर दिया तो सरकार ने इन पर रेड डालकर पैसा पकडक़र सपा से जोडक़र सपा को बदनाम करने की साजिश रची। सपा का दावा है कि कुछ दिनों पहले उनकी पार्टी से जुड़े कुछ लोगों के यहां छापे पड़े थे। मगर वहां से कुछ बरामद नहीं हुआ। जिसके बाद बौखलाई भाजपा ने तुरंत कानपुर में छापेमारी करके कैश बरामद कर उसे सपा से जोडक़र जनता के बीच दुष्प्रचार करने की साजिश रची। समाजवादी पार्टी का कहना है कि उनके समाजवादी इत्र से जुड़े व्यक्ति का नाम पुष्पराज जैन उफऱ् पम्पी जैन है। वह पार्टी के एमएलसी हैं और उनका ताल्लुक़ कन्नौज से हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि पम्पी जैन का छापे से कोई लेना-देना नहीं है। समाजवादी पार्टी के नेता, पीयूष जैन के फ़ोन कॉल रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक किए जाने की मांग कर रहे हैं, ताकि उनके मुताबिक बीजेपी से उनके संबंधों को उजागर किया जा सके, लेकिन समाजवादी पार्टी की इस सफ़ाई के बाद भी बीजेपी नेता लगातार जनसभाओं में समाजवादी इत्र और छापों के सपा से संबंध के आरोप लगा रहे हैं।

कौन हैं पीयूष जैन
पीयूष जैन मूल रूप से कन्नौज के रहने वाले हैं। उनके पास कन्नौज में एक घर, परफ्य़ूम फ़ैक्ट्री, कोल्ड स्टोरेज और पेट्रोल पंप है।
इसके अलावा मुंबई में भी उनका एक घर है और एक शोरूम भी है। उनकी कंपनियां मुंबई में रजिस्टर भी हैं। अधिकारियों के मुताबिक़, पीयूष जैन कऱीब 40 कंपनियों के मालिक हैं। जिनमें से दो मिडिल ईस्ट में भी हैं। हालांकि वह मुख्य रूप से इत्र व्यापारी के तौर पर ही जाने जाते हैं।