नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन करते समय जनसंख्या महत्वपूर्ण जरूर थी लेकिन इसको एकमात्र मानदंड नहीं बनाया गया है। जम्मू-कश्मीर को एक इकाई के रूप में देखा जाना चाहिए जहां की पूरी आबादी को 90 विधानसभा सीटों पर प्रतिनिधित्व दिया गया है। जम्मू-कश्मीर के पहले परिसीमन में बहुत सारी समस्याएं थीं जिन्हें ठीक कर लिया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने एक साक्षात्?कार में कहा कि जनसंख्या परिसीमन के मानदंडों में से केवल एक फैक्?टर है। जनसंख्या के अलावा परिसीमन अधिनियम, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के प्रविधानों के अनुसार चार अन्य मानदंड हैं। इनके अनुसार भौतिक स्थितियों, संचार सुविधाएं, सार्वजनिक सुविधाओं और प्रशासनिक इकाइयों पर भी विचार करना होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ तबकों की ओर से की जा रही आलोचना पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे। आलोचकों का आरोप है कि जनसंख्या अनुपात को देखते हुए कश्मीर डिवीजन को जम्मू की तुलना में कम सीटें मिलीं। चंद्रा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में परिसीमन की कवायद के दौरान जनसंख्या ही इकलौती मानदंड नहीं थी। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को अलग-अलग हिस्सों के रूप में नहीं देखा जा सकता है। यह एक एकल केंद्र शासित प्रदेश है। पूरी आबादी को 90 निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देना होगा। यह 20 जिलों और 207 तहसीलों को मिलाकर एक पूरी इकाई है। हमें इसे एक इकाई के रूप में देखना होगा। परिसीमन के बाद 90 सदस्यीय सदन में जम्मू संभाग में विधानसभा की 43 और कश्मीर की 47 सीटें होंगी।