श्रीराम मंदिर निर्माण: स्तंभों की मोटाई बढ़ाई गई, गर्भ गृह के लिए नए सिरे से पत्थरों की तराशी

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अयोध्या। रामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के मंदिर का निर्माण दिन-रात चल रहा है। सीबीआरआई रुडक़ी की अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार गर्भगृह के लिए नए सिरे से पत्थरों की तराशी की जा रही है। इनके स्तंभों की मोटाई लगभग तीन इंच बढ़ा दी गई है। स्तंभ साढ़े 14 से 16 फीट तक ऊंचे और आठ फीट व्यास वाले होंगे। प्रत्येक स्तंभ यक्ष-यक्षिणियों की 16 मूर्तियों से सुसज्जित होगा। इसलिए राजस्थान में गर्भगृह के लिए नये सिरे से एक लाख घनफुट पत्थरों की तराशी का काम किया जा रहा है। राममंदिर के मॉडल में परिवर्तन के पश्चात अब गर्भगृह के लिए नए सिरे से पत्थरों की तराशी की जा रही है। पुराने मॉडल के आधार पर रामघाट स्थित कार्यशाला में लगभग 30 वर्षों तक पत्थरों की तराशी कराई गई थी। इस तराशी में राममंदिर के गर्भगृह के लिए लगभग 75 हजार घनफुट पत्थर व 112 स्तंभों की तराशी व नक्काशी की जा चुकी थी। लंबे समय से खुले आसमान में होने के कारण लगभग 35 हजार घनफुट पत्थर अनुपयोगी हो गए। शेष 40 हजार घनफुट पत्थरों की सफाई कराकर उन्हें सुरक्षित करा दिया गया है। अब उनका आवश्यकतानुसार उपयोग किया जाएगा।
रात्रि में दूधिया प्रकाश में निर्माणाधीन कार्य को लेकर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोशल मीडिया में फोटो अपलोड कर कार्य की प्रगति के बारे में सांकेतिक जानकारी साझा की है। इस बारे में रामजन्मभूमि ट्रस्ट के न्यासी डा. अनिल मिश्र ने बताया कि फर्श का निर्माण अंतिम दौर में है। वहीं पश्चिम दिशा से शुरू हुए सुपर स्ट्रक्चर के निर्माण में तराशे गये करीब सवा दो सौ पत्थर लगाए जा चुके हैं। इस बीच राजस्थान से तराशे गये पत्थरों की आपूर्ति भी शुरू हो गयी है।
उधर मंदिर मॉडल में परिवर्तन होने व मंदिर की ऊंचाई बढऩे के पश्चात गर्भगृह के स्तंभों की डिजाइन में भी परिवर्तन कर दिया गया है। जो अब पहली मंजिल में 160 स्तंभ होंगे। मंदिर भवन के भार को देखते हुए इन स्तंभों की डिजाइन में परिवर्तन किया गया है। नए डिजाइन के पत्थरों की तराशी व नक्काशी राजस्थान में की जा रही है। राममंदिर की शिखर सहित ऊंचाई कुल 161 फीट होगी। मंदिर में तीन तल होंगे। प्रत्येक तल की ऊंचाई 20 फीट होगी। मंदिर के भूतल में 160 स्तंभ, प्रथम तल में 132 स्तंभ व दूसरे तल में 74 स्तंभ होंगे। जो पुराने पत्थरों व स्तंभों की तराशी की गई थी वह दो तल के हिसाब से थी। चूंकि मंदिर अब तीन तल का हो गया है इसलिए पुराने स्तंभ मंदिर का भार उठाने में सक्षम नहीं होंगे।